अंतराष्ट्रीय

चीन (चीन-)का वो खतरनाक हथियार

रॉड्स फ्रॉम गॉड’ : यहां दो बातें हैं. पहला हाइपरसोनिक स्पेस वेपन जिसे ‘रॉड्स फ्रॉम गॉड’ भी कहा जाता है और दूसरा चीन (चीन-) के टंगस्टन रॉड हथियार की टेस्टिंग. रॉड्स फ्रॉम गॉड हथियार की कल्पना 90 के दशक में शीत युद्ध के दौरान की गई थी. टंगस्टन की रॉड को किसी अंतरिक्ष यान से पृथ्वी पर गिराए जाने से क्या होगा? इस दौरान ये रॉड हाइपरसोनिक स्पीड से 12 हजार किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ़्तार से जबरदस्त काइनेटिक ऊर्जा उत्पन्न करेगा. पृथ्वी पर मौजूद किसी भी टारगेट पलक झपकते तबाह कर देगा.

हालांकि शीत युद्ध के दौरान अमेरिका ने इसे पूरा करने के लिए “प्रॉजेक्ट थार” लेकर आया था. उसने टंगस्टन की रॉड की मदद से रॉड्स फ्रॉम गॉड बनाने की कोशिश की. इसी क्रम उसने 2003 में HRB सिस्टम यानी (हाइपरवेलोसिटी रॉड बंडल्स) लाया. इसके जरिए 12 से 15 मिनट में किसी भी टारगेट को लक्षित किया जा सकता था. इससे परमाणु बम जितना ऊर्जा पैदा होगा और ये परमाणु बम के बंकर को भी तबाह करने का क्षमता रखता था. लेकिन ये प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पाया. इसके कई कारण थे, धन, समय और संसाधन.

लेकिन जहां सभी देश ऐसे हथियार की परिकल्पना कर रहे थे. वहीं चीन साल 2018 में टंगस्टन रॉड के प्रोटोटाइप के जरिए गोबी मरुस्थल में इसका सफल परीक्षण कर डाला. इस परीक्षण में 140 किलोग्राम टंगस्टन रॉड्स का प्रयोग किया गया. 4.6 किलोमीटर प्रति सेकंड रफ्तार से इस बंडल्स को गोबी मरुस्थल के एक टारगेट पर लक्षित किया गया. ये बंडल्स टारगेट पर गिरने के बाद, 3 मीटर गहरा और 4.6 मीटर चौड़ा छेद कर दिया. ऐसा माना जाता है कि चीन रॉड्स फ्रॉम गॉड बनाने में सफल रहा.

टेस्टिंग के बाद सबसे बड़ी जानकारी सामने आई कि अगर इन बंडल्स को हाइपरसोनिक स्पीड से गिराया जाए तो ये और भी नुकसान पहुंचा सकता है. वहीं, चिंता की बात ये है कि चीन टंगस्टन का दुनिया में सबसे बड़ा उत्पादक देश है. यहां 80% टंगस्टन का

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