दहशत ऐसी कि पैरों .( पैरों ) में ठोंकी थी बेड़ियां
पोलैंड के पीएन गांव में 17वीं शताब्दी के एक वैंपायर बच्चे का कंकाल मिला.( पैरों ) पुरातत्वविद इसे देखने के बाद चौंक गए क्योंकि इसके पैरों में ताले लगे हुए थे और कब्र में सिर उल्टा करके दफनाया गया था. वहीं, निकोलस कोपरनिक्स यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर डेरियस पोलिंस्की ने इस कंकाल के बारे में विस्तार से बताया है.
पोलैंड के निकोलस कोपरनिक्स यूनिवर्सिटी के पुरातत्वविदों ने एक कब्रिस्तान में 17वीं शताब्दी के एक वैंपायर बच्चे का कंकाल खोजा है. वैंपायर को हिंदी में “पिशाच” भी कहा जाता है.
इस बच्चे की उम्र 5 से 7 साल के बीच की बताई जा रही है. कब्र में बच्चे का मुंह नीचे की तरफ था. इसके पैर में ताला लगा हुआ था. वहीं, पुरातत्वविद ने इस ताले को एक प्रतीक बताया है.
निकोलस कोपरनिक्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डेरियस पोलिंस्की ने बताया कि, ‘वैंपायर के पैर में लगा ये ताला जीवन के एक चक्र के अंत का प्रतीक है.’ इसका उद्देश्य मृतक को वापस जीवन में लौटने से रोकना था.
एक अन्य पुरातत्वविद ने बताया, ‘ऐसी प्रथाएं लोक मान्यताओं से उत्पन्न हुई हैं. कभी कभी इन्हें पिशाच विरोधी बताया जाता है. ऐसी मान्यता है कि शव के मुंह को नीचे करके दफनाया जाता था, ताकि वह जीवित लोगों को नुकसान न पहुंचाएं. वहीं, एक अन्य कब्रगाह में एक महिला का कंकाल मिला है, ऐसी मान्यता है कि जब इसकी मृत्यु हुई थी तब ये एक वैंपायर थी.
वहीं, खुदाई में तीन अन्य बच्चों का शव मिले हैं. इनमें से एक बच्चे के मुंह में हरे रंग के जबड़े के टुकड़े मिले हैं. संभवतः यह तांबे से बना हुआ होगा
पुरातत्वविदों को यहां 30 से अधिक कब्रगाह मिले हैं. यहां 17वीं सदी के कंकाल मिलने की संभावना है. यहां लोगों को न केवल जीवन बल्कि पिशाचों के मरने के बाद भी डर लगा करता था. वहीं, उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया है कि बच्चों की हड्डियां अभी तक कैसे बची हुई हैं क्योंकि बच्चों की हड्डियां संरक्षित नही होती हैं, बल्कि गल जाती हैं.





