भीषण गर्मी से पूरी दुनिया (world d)में हाहाकार,
पिछले तीन दिनों से दुनिया (world d) भर में भीषण गर्मी काफी तबाही मचा रही है. 3, 4 और 5 जुलाई को उत्तरी गोलार्ध में गर्मी ने जुलाई महीने के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है. वैज्ञानिकों ने इसके पीछे का वजह जलवायु परिवर्तन और अल-नीनो को बताया है. धरती पर भीषण तापमान ने पिछले 44 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. पिछले तीन दिनों का औसत तापमान बढ़कर 17.2 डिग्री सेल्सियस हो गया था, जो जुलाई महीने में अपने आप में के रिकॉर्ड है. इसके पीछे कारन जो भी हो लेकिन उत्तरी गोलार्ध में भीषण तापमान का सामना अमेरिका से लेकर चीन तक सभी बड़े देश कर रहे हैं.
ग्लोबल वॉर्मिंग और और प्रशांत महासागर में उपजे अल-नीनों की वजह से पूरी दुनिया को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ रहा है. जुलाई महीने में भीषण गर्मी ने पिछले 44 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. 3 जुलाई का तापमान 17 डिग्री सेल्सियस था तो 4 और 5 जुलाई को औसत तापमान बढ़कर 17.2 डिग्री सेल्सियस हो गया है
जुलाई महीने में उत्तरी गोलार्ध में तापमान बारिश की वजह से कम होता है लेकिन जलवायु परिवर्तन और गर्म समुद्री हवा अल-नीनो की वजह से तापमान बढ़ा हुआ है. अल-नीनो की वजह से इस प्रशांत महासागर वाला क्षेत्र गर्म हो जाता है. वहीं, इसके क्षेत्र में आने वाले देश अमेरिका और चीन समेत कई देश भीषण गर्मी का सामना कर रहे हैं.
मायन यूनिवर्सिटी का क्लाइमेट रीएनालाइजर जो वैश्विक तापमान का रिकॉर्ड रखता है, ने बताया कि 3 जुलाई को तापमान 17 डिग्री के साथ रिकॉर्ड बनाया था लेकिन अगले ही दिन 4 और 5 जुलाई को अपना रिकॉर्ड तोड़ कर 17.2 डिग्री सेल्सियस हो गया था.
वैज्ञानिकों ने बताया कि अल-नीनो बारिश, भीषण गर्मी और सूखे का कहर साथ लेकर आता है. इसकी वजह से बढ़ता तापमान उन क्षेत्रों में नए रिकॉर्ड बना सकता है, जहां पहले ही तापमान औसत से अधिक रहता है. जर्नल साइंस में प्रकाशित एक रिसर्च से पता चला है कि 2023 में बनने वाला अल-नीनो वैश्विक अर्थव्यवस्था को 248 लाख करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा सकता है.
यूरोपीय यूनियन के वैज्ञानिकों ने बताया कि इस साल का जून का महीना पिछले महीने के 0.2 डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म रहा है. पिछले हफ्ते में दक्षिण और पूर्वी अमेरिका में हेत्वावे का दौर था. टेक्सास में हीटवेव की वजह से 13 लोगों की मौत हो चुकी है.
अल नीनो पूर्वी प्रशांत महासागर में ठंढ और गर्म स्थल को प्रभावित करने वाला एक जलवायु का पैटर्न है. इसके वजह से समुद्र ताल ठंडा हो जाता है. जिसके वजह से स्थल (भूमि का भाग) गर्म होने लगता है और स्थल का तापमान काफी गर्म हो जाता है. लेकिन उत्तरी गोलार्ध में इस महीने में तापमान का बढ़ना चिंता की विषय बन गयी है. अगर ऐसा ही रहा तो पृथ्वी का तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है. जो पेरिस एग्रीमेंट के खिलाफ होगा. (





