भारतीय-कनाडाई को खालिस्तानी (Khalistani)कट्टरपंथियों ने दी जान से मारने की धमकी,
टोरंटो. ब्रिटिश कोलंबिया में एक भारतीय-कनाडाई संगठन के प्रमुख को खालिस्तानी (Khalistani) कट्टरपंथियों ने जान से मारने की धमकी दी है. इस धमकी के पीछे की वजह ओटावा में भारत के उच्चायुक्त के सम्मान में पिछले महीने एक स्वागत समारोह का आयोजन करना बताई जा रही है. इस संबंध में शख्स ने स्थानीय कानून प्रवर्तन से शिकायत की है. रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) के अंतरिम आयुक्त को लिखे एक पत्र में, सरे, बीसी स्थित फ्रेंड्स ऑफ कनाडा और इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष मनिंदर गिल ने कहा कि उन्हें “लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं.” जहां से धमकी मिल रही हैं उन्होंने वहां का एरिया मोबाइल नंबर कोड 778 बताया. उन्होंने पत्र में लिखा है, ‘वे मुझे धमकी दे रहे हैं कि मेरा वही हाल होगा जो रिपुदमन सिंह मलिक का हुआ था जिसकी सरे में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.’
कनाडा की न्यायपालिका ने 2005 में एयर इंडिया कनिष्क बम विस्फोट मामले में 1985 में बरी हुए मलिक को पिछले साल 14 जुलाई की सुबह उन्हें सरे कार्यालय के बाहर हमलावरों ने गोली मार दी थी. उनकी मौत भारत की यात्रा के कुछ हफ्ते बाद हुई. दिन दहाड़े हुए इस हमले ने अटकलों को जन्म दिया कि यह हमला मलिक के अतीत से और हाल के सालों में खालिस्तानी अलगाववाद पर उनके बदले हुए रवैये से अहम रूप से जुड़ा हुआ हो सकता है.
जनवरी 2022 में, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था, जिसमें 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामलों को फिर से खोलने और उनके द्वारा की गईं अन्य पहलों के लिए उनकी प्रशंसा की, और एक अलग खालिस्तान की मांग को त्यागने के लिए समुदाय को एक खुला पत्र भी जारी किया.
क्या है पूरा मामला
गिल 19 मार्च को सरे के एक सम्मेलन केंद्र में हुए कार्यक्रम के प्रमुख आयोजक थे, वे पेशे से मीडियाकर्मी हैं. भारत के उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा इस स्वागत समारोह में भाग लेने वाले थे लेकिन लगभग 200 प्रदर्शनकारी वहां जमा हो गए जिनमें से कुछ के हाथ में तलवार भी थी. इसके चलते इस कार्यक्रम में वर्मा शामिल नहीं हुए.
गिल ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में आरसीएमपी की सरे टुकड़ी में शिकायत दर्ज कराई है और उन्हें सूचित किया गया है कि खतरे की जांच की जा रही है.
पत्र में उन्होंने यह भी लिखा, “मुझे आश्चर्य है कि मेरी क्या गलती है जो में इस तरह के हमले, दुर्व्यवहार और जान से मारने की धमकियों को झेलूं? मैं केवल एक शांतिपूर्ण सार्वजनिक समारोह आयोजित कर रहा था.”
उन्होंने बताया कि कनाडा ने “भारत के साथ संबंध सुधारने के लिए” एक इंडो-पैसिफिक रणनीति जारी की. नवंबर में जारी किए गए उस दस्तावेज़ में भारत को इस क्षेत्र में एक “महत्वपूर्ण भागीदार” के रूप में बताया गया है. उन्होंने कहा, “हर बार जब मैं अपने घर से बाहर निकलता हूं तो खालिस्तानी कट्टरपंथियों के चलते मेरा जीवन खतरे में पड़ जाता है. कृपया इस स्थिति को देखें और सुनिश्चित करें कि कनाडा में भारतीय-कनाडाई समुदाय शांति से रह सके और सरे शहर में कानून का शासन बहाल हो.
उन्होंने इस मामले में कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यालय को भी ईमेल किया था. उन्हें इसके जवाब में कहा गया कि “टिप्पणियों” की “सावधानीपूर्वक समीक्षा” की जाएगी और इसे सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री मार्को मेंडोकिनो को भेज दिया गया है.
गिल ने यह भी कहा कि स्वागत समारोह की आयोजन समिति के अन्य सदस्यों को भी जान से मारने की धमकियां मिली हैं. उन्होंने कहा, “कई अन्य लोगों को भी धमकियां मिली हैं, लेकिन वे सामने आने से डर रहे हैं.”





