आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट विकेश नेगी की मेहनत ला रही रंग – चाय बागान की भूमि के दस्तावेजों के छेड़छाड़ मामले में केस दर्ज, दून के भूमाफिया में कोहराम, सीबीआई करे जांच !
यह भी बता दें कि जिला प्रशासन ने पहले इस मामले को हलके में लिया तो हाईकोर्ट भी इस मुद्दे पर सख्त हो गया। नैनीताल हाईकोर्ट ने चाय बागान की सीलिंग की भूमि की खरीद-फरोख्त मामले में दायर एक जनहित मामले की सुनवाई के दौरान सरकार द्वारा समय पर हलफनामा दाखिल न किये जाने पर नाराजगी जतायी। हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इस जुर्माने को हलफनामा दाखिल करने में कोताही बरतने वाले अधिकारी से वसूलने के आदेश दिये गये हैं। यह जनहित याचिका एडवोकेट विकेश नेगी ने दायर की है। इसमें कहा गया है कि चाय बागान की सीलिंग की जमीन सरकार की है, लेकिन कुछ अफसरों और भूमाफिया की मिलीभगत से इस भूमि की अवैध खरीद-फरोख्त हो रही है। इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस विपिन सांघवी और जस्टिस राकेश थपलियाल की बेंच कर रही है।
इस मामले को उजागर करने वाले अधिवक्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट विकेश नेगी ने कहा कि यदि विंडलास की भूमि घोटाले का एक छोटा सा मामला सीबीआई को सौंपा जा सकता है तो चाय बागान की चार हजार और सीलिंग की तीन हजार बीघा जमीन जो कि करोड़ों की है, उसकी जांच एसआईटी की बजाए सीबीआई को देनी चाहिए। उनके अनुसार इस मामले में निबंधन और राजस्व विभाग के अफसरों की मिलीभगत है और इसके तार पूरे उत्तर भारत में फैले हुए हैं। उन्होंने कहा कि एसआईटी बाहर के प्रदेशों में मामले की जांच नहीं कर सकती है। ऐसे में यह जांच सीबीआई को देनी चाहिए। विकेश नेगी ने कहा देहरादून नगर निगम से जुड़े भूमि प्रकरण, भू रिकार्ड व रजिस्ट्रीयों की जांच भी सरकार को करानी चाहिए। यहां भी जमीनों के गड़बड़झाले से जुड़े कई बड़े खुलासे होंगे। विकेश नेगी ने बताया कि कुछ समय पहले नगर निगम में जमीनों से संबधित रिकार्ड चोरी हुआ था। जिसको लेकर शहर कोतवाली में मुकदमा भी दर्ज किया गया था। लेकिन कार्रवाई के नाम पर इस पूरे मामले में कुछ नहीं हुआ है। उन्होंने कहा जमीनों के घोटाले को अफसरों और नेताओं की मिलीभगत से ही भूमाफिया अंजाम देते हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत होगी तो इस मामले में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की जाएगी।