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बांग्लादेश में फिर तख्तापलट की तैयारी – पूर्व सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री मोहम्मद-ए-अराफात

ढाका -: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस और उनके सहयोगियों पर आवामी लीग के नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद अराफात ने कई आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यूनुस और उनके करीबियों के साढ़े सात महीने ऐश में बीते हैं और उन्होंने बांग्लादेश को आर्थिक रूप से खोखला करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। पूर्व सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री मोहम्मद-ए-अराफात ने दावा किया कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था भले ही डूब रही हो, लाखों लोगों ने अपनी आजीविका खो दी हो, मुद्रास्फीति नियंत्रण से बाहर हो गई हो, लेकिन बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस और उनके विश्वासपात्रों ने साढ़े सात महीने बहुत अच्छे से गुजारे हैं।

  • बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार हैं यूनुस
  • बैंकों की व्यवस्था में छेड़छाड़ का आरोप
  • मोहम्मद-ए-अराफात ने बोला हमला

आवामी लीग के नेता ने मोहम्मद यूनुस पर लगाए आरोप; कहा- ऐश कर रहे

पूर्व सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री मोहम्मद-ए-अराफात ने दावा किया कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था भले ही डूब रही हो लाखों लोगों ने अपनी आजीविका खो दी हो मुद्रास्फीति नियंत्रण से बाहर हो गई हो लेकिन बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस और उनके विश्वासपात्रों ने साढ़े सात महीने बहुत अच्छे से गुजारे हैं। अराफात ने यूनुस पर कई आरोप लगाए हैं।

आवामी लीग ने लगाए आरोप

एक बांग्लादेशी समाचार एजेंसी की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए अवामी लीग के नेता मोहम्मद अराफात ने कहा कि ग्रामीण कल्याण को 54.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर के करों से राहत मिली है। उच्च न्यायालय ने तीन अक्टूबर को अपने ही चार अगस्त के पहले के फैसले को वापस ले लिया, जिसमें ग्रामीण कल्याण को राष्ट्रीय राजस्व बोर्ड (एनबीआर) को 2012 से 2017 तक के अवैतनिक करों में लगभग 54.8 मिलियन डॉलर का भुगतान करने का आदेश दिया गया था। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रीय राजस्व बोर्ड (एनबीआर) ने ग्रामीण बैंक को 2029 तक पांच साल के लिए कर छूट का दर्जा प्रदान किया, जिसमें सभी प्रकार की आय शामिल है,

                                                  जैसे संपत्तियों और वाहनों से किराये की आय, बैंक ब्याज और अन्य आय। अंतरिम सरकार ने एक मसौदा अध्यादेश तैयार किया है, जिसका उद्देश्य बैंक में सरकार के शेयरों को 25 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करना और सरकार की तरफ से नियुक्त निदेशकों को तीन से घटाकर एक करना है। अराफात ने बताया कि अंतरिम सरकार ने कहा था कि स्वतंत्रता बढ़ाने के लिए यह निर्णय लिया गया था। विश्लेषकों का मानना है कि बैंक में सरकार की हिस्सेदारी को कम करने का असली कारण बैंक के प्रबंधन में यूनुस के वफादारों का नियंत्रण मजबूत करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूनुस के भतीजे अपूर्व जहांगीर बिना मीडिया या जनसंपर्क में पृष्ठभूमि के मुख्य सलाहकार का उप प्रेस सचिव नियुक्त किया गया है।

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