15 नवंबर के बाद होगा नगर निकाय चुनाव का ऐलान !

चुनाव की घोषणा 15 नवंबर के आस-पास होने की उम्मीद है क्योंकि 5 जनवरी 2023 को यूपी की सभी नगर निकायों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। यूपी में नगर निकाय चुनाव 2022 की तैयारियां बेहद रफ़्तार से चल रही हैं। इसे 2024 के लोकसभा चुनाव से भी जोड़ा जा रहा है। जानकारी के अनुसार, चुनाव की घोषणा 15 नवंबर के आस-पास होने की उम्मीद है क्योंकि 5 जनवरी 2023 को यूपी की सभी नगर निकायों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। निर्वाचन आयोग चुनाव कराने की तैयारी में जुटा हुआ है।
चुनाव 20 दिसंबर से पहले कराया जाएगा :-
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज कुमार ने बताया कि 31 अक्टूबर को मतदाता सूची का ड्राफ्ट प्रकाशित किया जाएगा। 8 से 12 नवंबर तक उन पर दावे और आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा। 14 से 17 नवंबर तक पूरक सूचियों की पांडुलिपियों की तैयारी और उन्हें मूल सूची में समाहित करने की कार्यवाही होगी। 18 नवंबर को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा।
चलिए जानते हैं इस बार अयोध्या जिले से कौन-से प्रत्याशी इस चुनाव में अपनी किस्मत आज़मा आ रहे हैं।
गोसाईगंज विधानसभा वार्ड नंबर 1 से पार्षद पद के लिए कंचन कुमारी
अयोध्या जिले के गोसाईगंज विधानसभा वार्ड नंबर 1 से पार्षद पद के लिए कंचन कुमारी खड़ी हुई हैं। वह तीसरी बार पार्षद पद का चुनाव लड़ने जा रही हैं। उन्होंने बताया कि वह इस बार वार्ड नंबर-1 से चुनाव लड़ रही हैं। वह इस वार्ड से इसलिए चुनाव लड़ रही हैं क्योंकि पिछली पार्षद ने यहां कोई काम नहीं किया था। वार्ड में महिलाओं के लिए शौचालय नहीं बना है। जीतने के बाद वह सबसे पहले शौचालय बनवाने का काम करेंगी और इसके अलावा इंटरलॉकिंग, आवास, राशन आदि के भी वह सारे काम करेंगी।
वह साल 2013 से 2017 व 2018 से वर्तमान में भी पार्षद का कार्यभार संभाल रही हैं।
कंचन ने खबर लहरिया को बताया कि, इस बार मैं जिस वार्ड से लड़ूंगी, वहां से पहली बार लड़ रही हूँ। मुझे लगातार लोगों का प्यार मिला है। लोगों का सपोर्ट मिला है। लोगों ने मेरे काम को पसंद किया है इसलिए मुझे दो बार पार्षद बनने का अवसर मिला। शुरुआती दौर में जब मैंने पहली बार वार्ड नंबर-27 से पार्षद पद का चुनाव लड़ने के लिए सोचा तो वहां पर नालियां नहीं थी। बहुत कम लोगों के पास आवास थे तो मैंने लोगों से वादा किया कि मैं पार्षद बनने के बाद सारी समस्याओं को दूर करूंगी। मैं पार्षद बनी तो सबसे पहले नालियां बनवाई और जो पात्र लोग थे, उन लोगों को आवास दिलाये। इसके बाद लगातार मैं दूसरी बार भी पार्षद बनी।
आगे कहा, मैं पार्ट टाइम बिज़नेस भी करती हूँ। मेरी साड़ी की दुकान है। मैं कभी-भी समूह में जाकर लोगों से नहीं मिलती हूँ। मैं और मेरे पति डोर टू डोर जाकर लोगों से मिलते हैं। चुनाव में मेरी यही खासियत लोगों को पसंद आती है। मैं जो बोलती हूँ मैं वह करती हूँ।
- बीकापुर विधानसभा से चेयरमैन पद के प्रत्याशी
- बीकापुर विधानसभा से चेयरमैन पद के लिए राकेश पांडे राणा
- अयोध्या के बीकापुर विधानसभा से चेयरमैन पद के लिए राकेश पांडे राणा खड़े हुए हैं। वह दूसरी बार बीकापुर से चेयरमैन पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। पिछली बार वह कुछ ही वोटों से हार गए थे।
वह कहते हैं, इस बार मुझे जनता का और नगर के लोगों का बहुत प्यार और सपोर्ट मिल रहा है तो इस बार मैं ज़रूर से जीतूंगा। वहीं दो कार्यकाल से चेयरमैन के पद पर रह रहे अधिकारी पर वह तंज कसते हुए कहते हैं, इनके कार्यकाल में कोई भी काम नहीं हुआ है। नगर पंचायत के लोगों के लिए मैं वो सारा काम करूंगा। इसके लिए मैंने तैयारी भी शुरू कर दी है।
क्या होता है नगर निकाय चुनाव?
स्थानीय शासन के अंतर्गत इसे सबसे पहले नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत में विभाजित किया जाता है। अगर हम नगर निगम की बात करें तो ऐसे शहर जिसमें लोगों की जनसंख्या 10,00,000 से अधिक है ऐसे शहरों को नगर निगम कहा जाता है।
नगर निगम के अंतर्गत मेयर और पार्षद का चुनाव होता है। इसी प्रकार ऐसे शहर जिसमें लोगों की जनसंख्या 10 लाख से कम होती है उन शहरों का नगर पालिका द्वारा स्थानीय विकास किया जाता है।
एक नगरपालिका के अंतर्गत अध्यक्ष और सभासद का चुनाव होता है। अगर हम नगर पंचायत की बात करें तो एक ऐसे क्षेत्र जो ना तो पूरी तरह से शहर होते हैं और ना ही पूरी तरह से कस्बे होते हैं ऐसे क्षेत्रों को नगर पंचायत कहा जाता है।
नगर निकाय का काम
नगर निकाय का चुनाव हर 5 साल में होता है। नगर निकाय का काम होता है कि उसके अंतर्गत जो पार्षद और सभासद चुने जाते हैं, वह नगर क्षेत्र, नगर निगम और नगर पालिका का काम करें। वहां की देख-रेख करें व लोगों की समस्या को सुलझाएं। नगर निकाय चुनाव को लेकर सत्ताधारी बीजेपी की पार्टी संग कांग्रेस, सपा, बसपा आदि पार्टियों ने भी अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। ऐसे में यह सवाल बना हुआ है कि चुनाव हेतु अधिसूचना 15 नवंबर तक ज़ारी होती है या नहीं?