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जेपी नड्डा को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर दिया जा सकता है दोबारा अवसर..

जेपी नड्डा को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर दोबारा अवसर दिया जा सकता है। 2024 के लोकसभा चुनावों के पहले पार्टी वर्तमान केंद्रीय टीम में कोई छेड़छाड़ नहीं करना चाहती है, लिहाजा जेपी नड्डा को दुबारा पार्टी का शीर्ष पद सौंपा जा सकता है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और केंद्र सरकार के साथ बेहतर समन्वय, पार्टी के निचले स्तर तक के कार्यकर्ताओं के साथ उनका बेहतर तालमेल और उनके कार्यकाल में पार्टी में कोई विवाद न होना उनकी दावेदारी को मजबूत कर रहा है। नड्डा को 20 जनवरी 2020 को पार्टी अध्यक्ष बनाया गया था। इसके पहले जून 2019 में उन्हें पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई थी। नड्डा का कार्यकाल अगले वर्ष जनवरी में समाप्त हो रहा है।

जगत प्रकाश नड्डा (जेपी नड्डा) के कार्यकाल में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया है। इसी वर्ष पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी ने चार राज्यों में शानदार जीत हासिल करने में सफलता हासिल की थी। इसमें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की जीत को रिकॉर्ड उपलब्धि के तौर पर देखा गया था क्योंकि इन राज्यों में लंबे समय से कोई सत्तारूढ़ पार्टी लगातार दुबारा सरकार बनाने में असफल रही थी।

सबके साथ बेहतर समन्वय
जेपी नड्डा की सबसे बड़ी शक्ति उनका सभी नेताओं के साथ बेहतर संबंध होना माना जाता है। पार्टी संगठन में वे शीर्ष पर होने के बाद भी उनका अन्य नेताओं के साथ बेहतर समन्वय बना हुआ है। पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह, बीएल संतोष के साथ-साथ संगठन के बाहर के पार्टी नेताओं से भी उनका तालमेल बेहतर बना हुआ है। उन्हें पार्टी नेताओं का पूरा साथ मिल रहा है। पार्टी के प्रदेश यूनिटों से भी उनका बेहतर तालमेल बना हुआ है।

केंद्र की नीतियों को निचले स्तर तक पहुंचाया
टीम नड्डा ने केंद्र सरकार की योजनाओं और कार्यों को जनता तक पहुंचाने में बेहतर भूमिका निभाई है। नड्डा ने पार्टी के मंत्रियों, सांसदों, विधायकों से लेकर निचले स्तर तक के कार्यकर्ताओं को समय-समय पर केंद्र सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से अभियान चलाया है। केंद्र सरकार के कार्यों की चर्चा जिस तरह से आम जनता के बीच हुई है, उससे पार्टी को लाभ मिला है। माना जाता है कि चार राज्यों में पार्टी को मिली शानदार जीत में केंद्र की योजनाओं को निचले स्तर तक पहुंचाने के कारण सरकार को मिली लोकप्रियता का बड़ा हाथ था। अब जबकि केंद्र सरकार दुबारा लोकसभा चुनावों में उतरने की तैयारी कर रही है, उसे एक ऐसी टीम की जरूरत है जो उसके कार्यों को जनता के बीच बेहतर तरीके से पहुंचा सके। नड्डा भी इसके लिए लगातार प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के संपर्क में बने रहते हैं। यही कारण है कि नड्डा की वर्तमान टीम में कोई बदलाव न किए जाने का निर्णय किया जा सकता है।

दरअसल, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के बाद हुए चुनाव में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा था। हार के बाद हुए मूल्यांकन में पार्टी ने पाया था कि वह अपने कार्यों और नीतियों को जनता के बीच बेहतर तरीके से नहीं पहुंचा सकी जिसके कारण चुनावों में उसकी हार हुई। इससे सबक लेते हुए पार्टी ने वर्तमान सरकार के कार्यों को जनता के बीच पहुंचाने की बेहतर रणनीति बनाई जिसका लाभ उसे मिल रहा है। एबीवीपी और संघ से निकले नड्डा पार्टी की इस सोच को बेहतरीन ढंग से अंजाम दे रहे हैं। यही कारण है कि 2024 के पहले उन्हें डिस्टर्ब न करने की रणनीति अपनाई जा सकती है।

24 घंटे काम करने वाले नेता की छवि
भाजपा को लगातार मिल रही चुनावी जीत के पीछे उसके उन नेताओं की बड़ी भूमिका मानी जाती है जो संगठन के लिए लगातार 24 घंटे काम करते हैं। पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह को फुल टाइम पॉलिटीशियन माना जाता है। वे लगातार काम करते हैं और एक चुनाव बीतते ही दूसरे चुनाव की तैयारी में लग जाते हैं। जेपी नड्डा ने मोदी और शाह की इसी रणनीति को अपनाया है औऱ वे लगातार पार्टी के विस्तार के लिए सक्रिय रहते हैं।

इस साल भाजपा को गुजरात और हिमाचल प्रदेश के दो महत्त्वपूर्ण राज्यों में चुनावों का सामना करना है। इसके अगले वर्ष मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान सहित नौ राज्यों में चुनावों से होकर गुजरना है। नड्डा इस समय न केवल गुजरात और हिमाचल प्रदेश को लेकर तैयारी कर रहे हैं, बल्कि वे त्रिपुरा का दौरा कर रहे हैं जहां अगले साल चुनाव हैं। वे लोकसभा चुनावों के बाद होने वाले दिल्ली-बिहार विधानसभा चुनावों के लिए भी पार्टी की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। उनकी इसी मेहनत को देखते हुए पार्टी उन्हें दुबारा कार्यकाल देने पर विचार कर रही है।

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विवादों में नहीं घिरे
एक नेता के रूप में, विशेषकर राजनीति के वर्तमान दौर को देखते हुए, जेपी नड्डा की बड़ी उपलब्धि यह भी मानी जा रही है कि उनके नाम अब तक कोई विवाद नहीं है। विधि स्नातक जेपी नड्डा अपने भाषणों में भी बेहद संयमित रहते हैं। वे विपक्ष पर हमला बोलते हुए भी अपने पद और गरिमा का पूरा ख्याल रखते हैं। उनके भाषणों में भी कभी असंसदीय भाषा का उपयोग नहीं देखा गया है। यही कारण है कि उनके अपनी पार्टी के साथ-साथ दूसरी पार्टियों के विभिन्न नेताओं के साथ भी बेहतर संबंध बने हुए हैं। एक नेता के तौर पर यह उनकी बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

गुटबाजी रोकने में निभाई अहम भूमिका
नड्डा की बड़ी सफलता रही है कि उनके नेतृत्व में पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं उभर पाई। पार्टी ने एक यूनिट के रूप में काम किया और जिन कार्यों को अपने हाथ में लिया, उन्हें पूरा किया। अब तक के उनके तीन साल से ज्यादा (कार्यकारी अध्यक्ष का कार्यकाल जोड़कर) के कार्यकाल में पार्टी से जुड़ा कोई ऐसा विवाद भी नहीं हुआ है जो संगठन पर उनकी पकड़ को कमजोर करता हो या विवाद पैदा करने वाला हो।

संगठन में हो चुके बड़े बदलाव
नड्डा के कार्यकाल में लंबे समय बाद पार्टी के संसदीय बोर्ड का दुबारा पुनर्गठन हुआ है। उत्तर प्रदेश सहित अनेक प्रदेशों के अध्यक्ष बदले जा चुके हैं तो संगठन महामंत्रियों की जिम्मेदारियों में भी बड़ा बदलाव किया जा चुका है। दिल्ली, मध्यप्रदेश सहित कुछ राज्यों के अध्यक्षों को भी जल्द ही बदला जाना है। ऐसे में नए अध्यक्ष के रूप में किसी नए व्यक्ति के पास संगठन में कोई बड़ा बदलाव करने की गुंजाइश नहीं बचेगी। लिहाजा माना जा रहा है कि भाजपा लोकसभा चुनावों में वर्तमान टीम के साथ ही उतरने की रणनीति आजमा सकती है।

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