सोयाबीन तेल के भाव में सुधार, बाकी तेल तिलहन पूर्ववत रहे

नईदिल्ली। शिकागो एक्सचेंज के लगभग आधा प्रतिशत मजबूती के साथ बंद होने से दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में सोयाबीन तेल की कीमतों में सुधार देखने को मिला जबकि आयात भाव के मुकाबले सोयाबीन का स्थानीय भाव कम होने से सोयाबीन तिलहन के भाव पूर्व-स्तर पर बने रहे। पामोलीन तेल के भाव टूटने के बीच बाकी लगभग सभी खाद्य तेल-तिलहनों की कीमतें पिछले स्तर पर बंद हुईं।
बाजार के जानकार सूत्रों ने बताया कि सोयाबीन डीगम तेल का आयात कहीं महंगा बैठता है और इस तेल का स्थानीय भाव भी कमजोर होने से इसके आयात में नुकसान है। पामोलीन तेल का भाव इतना कम है कि इसके आगे कोई खाद्यतेल नहीं टिकेगा। पामोलीन इसी तरह सस्ता बना रहा तो अगले लगभग सवा महीने बाद आने वाली सोयाबीन, मूंगफली और बिनौला की फसल की खपत को लेकर दिक्कत आ सकती है। सूत्रों ने कहा कि ऐसा होने पर सरकार को घरेलू किसानों के हित साधने के लिए समुचित कदम उठाने होंगे।
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सूत्रों के मुताबिक, विदेशों में खाद्य तेलों के भाव टूट गये हैं और सरकार ने आयात शुल्क में भी ढील दे रखी है। इसके बावजूद कीमतों में हुई टूट के मुकाबले उपभोक्ताओं को उसका 25-30 प्रतिशत भी लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसका कारण खुदरा कारोबार में अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) जरुरत से कहीं ज्यादा रखा जाना है।