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अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan’)की शुरुआती फिल्में फ्लॉप रही

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के बिजनौर से जब एक छोटा बालक नाना की तिजोरी से 13 रुपये चुराकर मुंबई आया, तो सपनों का सागर उसकी आंखों के सामने तैर रहा था. रेडियो पर बॉलीवुड के गाने सुनते-सुनते फिल्मों में काम करने का जुनून मुंबई खींच तो लाया, पर छोटे बच्चे को भला कौन क्या काम देता? तब बिजनौर के ही रहने वाले कल्लू नाई ने उन्हें अपने यहां काम करने का मौका दिया. बालक के नाना उसे ढूंढते हुए मुंबई पहुंचे और उसे वापस घर ले आए, पर फिल्मों में काम करने का जुनून बालक को चैन नहीं लेने दे रहा था. वे कुछ दिन बाद फिर मुंबई आ गए. वह बालक बड़ा होकर बॉलीवुड के सबसे सफल निर्देशकों में से एक बना, नाम है- प्रकाश मेहरा.

अमिताभ बच्चन(Amitabh Bachchan’)  को महानायक बनाने का श्रेय प्रकाश मेहरा को ही जाता है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म निर्देशक के ममेरे भाई ने प्रकाश मेहरा के बचपन और संघर्षों के बारे में कई खुलासे किए थे. डायरेक्टर के भाई राजेश खन्ना ने कभी बताया था कि जब वे नाई की दुकान पर काम करते थे, तब उनकी कुछ निर्माता-निर्देशकों से पहचान बन गई थी. उन्हें फिल्में लिखने का मौका मिला. वह भी समय आया, जिसका उन्हें बरसों से इंतजार था. उन्हें 1972 में ‘समाधि’ और ‘मेला’ जैसी फिल्मों का निर्देशन करने का अवसर मिला.
प्रकाश मेहरा बॉलीवुड के सबसे सफल निर्देशकों में से एक रहे हैं.
प्रकाश मेहरा कुछ बड़ा करने की सोच रहे थे. किसी तरह दोस्त से 25 हजार रुपये मिले, तो फिल्म निर्देशित करने के साथ-साथ उसे प्रोड्यूस करने का मन बना लिया. उस समय अमिताभ बच्चन के सितारे गर्दिश में थे. उनकी फिल्में एक के बाद एक फ्लॉप हो रही थीं. फिल्म निर्देशक और निर्माता उनसे दूर भागने लगे थे.

अमिताभ बच्चन खुद को एक और चांस देना चाहते थे. तब उनकी मुलाकात प्रकाश मेहरा से हुई. दोनों के करियर को एक-दूसरे का सहारा चाहिए था. फिल्म ‘जंजीर’ के लिए दोनों साथ आए. फिल्म रिलीज होने के बाद दोनों के सितारे बुलंदी पर पहुंच गए. फिल्म सुपरहिट रही. इस जोड़ी को आगे भी खुद को साबित करना था.

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