राजनीति में हाशिए पर आधी आबादी !!

देहरादून – महिलाओं ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन, शराब बंदी, पर्यावरण बचाने के लिए चिपको आंदोलन में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाया। लेकिन राजनीति के क्षेत्र में महिलाओं को तरजीह नहीं मिल पाई। उत्तराखंड के जन आंदोलनों में सक्रिय रहने के बाद भी महिलाएं राजनीति में हाशिए पर रही हैं।
यहां की महिलाओं ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन, शराब बंदी, पर्यावरण बचाने के लिए चिपको आंदोलन में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाया। लेकिन राजनीति के क्षेत्र में महिलाओं को तरजीह नहीं मिल पाई। राजनीतिक पार्टियां महिलाओं के सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर बनने के दावे तो करती हैं। लेकिन महिलाओं को पूरा हक नहीं मिल पाता है।
पोलिंग बूथ पे नहीं जाना पड़ेगा कोरोना मेरीजो को वोट डालने के लिए..
जबकि 2017 के चुनाव में कुल 723 प्रत्याशियों में 80 महिलाओं ने चुनाव लड़ा है। जिसमें पांच महिलाएं चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचीं। जिसमें कांग्रेस से इंदिरा हृदयेश, ममता राकेश, भाजपा से रेखा आर्य, रितू खंडूड़ी और मीना गंगोला विधायक हैं। इसमें हल्द्वानी सीट से विधायक एवं नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश का निधन हो गया है।
वर्तमान में महिला विधायक
- इंदिरा हृदयेश हल्द्वानी कांग्रेस
मीना गंगोला भाजपा
रेखा आर्य भाजपा
ऋतु खंडूड़ी भाजपा
ममता राकेश कांग्रेस
मुन्नी देवी थराली(उपचुनाव) भाजपा
चंद्रा पंत पिथौरागढ़(उपचुनाव) भाजपा