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यहाँ के लोग भेड़िये के आतंक से परेशान थे !

महराज सुहेलदेव के पराक्रम और शौर्य की परिणति थी कि 150 वर्ष तक कोई विदेशी आक्रांता भारत पर हमला करने का दुस्साहस नही कर पाया पिछली सरकारें सिर्फ घोषणा करती थी,तहसील आज बन गया है,मैं स्वयं इस तहसील को आपको समर्पित करने आया हूँ,ऐसा नही है कि यहां के अधिकारी बहराइच में रहेंगे,वो यही रहेंगे, उनके लिए आवास की व्यवस्था यही की गई है, यही व्यवस्था हर तहसील,थाने पर की गई है,रात्रि विश्राम यही करेंगे,बहानेबाजी नही चलेगी…यहाँ के लोग भेड़िये के आतंक से परेशान थे,उसने यहां जनहानि की थी,जनहानि की भरपाई नही हो सकती लेकिन उसके लिए मुआवजा तत्काल उपलब्ध करवाया जाता है. |

यह वही जनपद है जहां कभी अव्यवस्था अराजकता थी , अब ऐसा नही है..

किसी भी आक्रांता का महिमामंडन करने का मतलब देशद्रोह की नींव को पुख्ता करना है,स्वतंत्र भारत किसी देशद्रोही को स्वीकार नही कर सकता,जो भारत के महापुरुषों को अपमानित करता हो,उन आक्रांताओं का महिमामंडन करता हो,जिन्होंने भारत की सनातन संस्कृति को रौंदने का काम किया था,हमारी आस्था पर प्रहार किया था,उसे आज का नया भारत कतई स्वीकार नही कर सकता

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