रेलवे सुरक्षा में उत्तर मध्य रेलवे ने मारी बाजी, कवच प्रणाली लागू करने में बना नंबर वन !

उत्तर मध्य रेलवे रेल परिचालन को अधिक से अधिक संरक्षायुक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है । इसी क्रम में उत्तर मध्य रेलवे अत्याधुनिक कवच प्रणाली लागू की जा रही है।- उत्तर मध्य रेलवे में कुल 2500 किलोमीटर कवच कार्य है स्वीकृत
- 1300 किलोमीटर कवच कार्य की निविदा प्रक्रिया हो चुकी पूरी
उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य मार्गों पर कवच प्रणाली लागू करने वाले अग्रणी रेलों में से एक है। यह प्रणाली उत्तर मध्य रेलवे के सभी प्रमुख मार्गो पर स्थापित की जा रही है। यह प्रणाली दिल्ली हावड़ा, दिल्ली मुंबई एवं दिल्ली चेन्नई मार्गों पर स्थापित की जा रही है। उत्तर मध्य रेलवे में कुल 2500 किलोमीटर कवच कार्य स्वीकृत है,40 मीटर के 07 त्रिकोणीय ट्यूबलर संचार टावर बनाए गए हैं और 07 मौजूदा मोबाइल ट्रेन रेडियो क्म्यूनिकेशन टावर का उपयोग स्टेशन से लोको अल्ट्रा हाई फ्रिकेवेंसी संचार नेटवर्क प्रदान करने के लिए किया जाता है। अब इसको नवीनतम निर्देशों के अनुसार कवच वर्ज़न 4.0 के अनुरूप अपग्रेड भी किया जा रहा है। उत्तर मध्य रेलवे ने प्रयागराज-कानपुर सेक्शन में भी कवच 4.0 सिस्टम की स्थापना का महत्वपूर्ण कार्य कर लिया है। इसमें सभी 4 प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग यानी हिताची, क्योसन, सीमेंस और मेधा को कवच सिस्टम में इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग डेटा के निर्बाध हस्तांतरण के लिए प्रोटोकॉल कन्वर्टर्स का उपयोग करके सीधे स्टेशन कवच से जोड़ा गया है।
कानपुर से पंडित दीन दयाल उपाध्याय सेक्शन में टावर और भवन जैसे बुनियादी ढांचे का काम पूरा हो चुका है। वर्तमान में अंतिम तैयारी के लिए प्रयागराज से कानपुर (186 किमी) तक लाइट इंजन लोको ट्रायल किए जा रहे हैं। स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकनकर्ता और उचित तकनीकी मंजूरी के बाद 25 मार्च तक सेक्शन को यात्री यातायात के लिए चालू कर दिया जाएगा।
इसी क्रम में उत्तर मध्य रेलवे के चिपियाना (छोड़कर) – कानपुर (छोड़कर) सेक्शन में कवच स्थापना कार्य कवच वर्ज़न 4.00 के अनुरूप किया जा रहा है। इसमें चिपियाना (छोड़कर) – इटावा (सहित) सेक्शन में कवच उपकरण स्थापना कार्य पहले ही पूरा हो चुका है और वर्तमान में चिपियाना (छोड़कर) – टूंडलाL (छोड़कर) सेक्शनमें कवच लोको परीक्षण प्रगति पर हैं और इस खंड में कवच प्रणाली कमीशनिंग मार्च 2025 तक पूरी करने की योजना है।

