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हिजाब विवाद: शिक्षण संस्थानों में रोक के खिलाफ सुनवाई शुरू, जाने पूरा मामला

बेंगलुरु। हिजाब विवाद: शिक्षण संस्थानों में रोक के खिलाफ सुनवाई शुरू, जाने पूरा मामला, कर्नाटक में हिजाब विवाद को लेकर हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई शुरू हो गई है। सुनवाई से पहले इस विवाद में नया मोड़ देखने को मिला जब याचिकाकर्ता छह मुस्लिम छात्राओं ने एक नई याचिका दायर की। इसमें कहा गया है कि कुछ राज्यों में चुनाव होने हैं इसलिए इस मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है और इसी लिए छात्राओं को भी प्रताडि़त किया जा रहा है।

कर्नाटक के शिक्षण संस्थानों में हिजाब पर रोक के खिलाफ याचिकाओं पर हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू

छात्राओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर पेश हो रहे हैं। इससे पहले सोमवार को सुनवाई के दौरान इन छात्राओं ने हाईकोर्ट से कहा था कि मुस्लिम छात्राओं को स्कूल की यूनिफार्म के रंग से मेल खाता हुआ हिजाब पहनने की अनुमति दी जाएं। ये छात्राएं उडुपी के प्री यूनिवर्सिटी (पीयू) कालेज की हैं। छात्राओं का कहना है कि हिजाब पहनना अनिवार्य धार्मिक प्रथा है और इसके इस्तेमाल पर प्रतिबंध भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 का उल्लंघन है।

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केंद्रीय स्कूलों में भी यूनिफार्म के रंग का हिजाब पहनने की अनुमति होती है। इस विवाद के बीच राज्य में कुछ स्थानों पर लड़कियों ने प्री परीक्षा का बहिष्कार कर दिया है। कुछ स्थानों पर अभिभावक ही बच्चों को स्कूल भेजने से कतराने लगे हैं। शिवमोग्गा शहर के कर्नाटक पब्लिक स्कूल में कई छात्राओं ने कक्षा 10वीं की प्रारंभिक परीक्षा का बहिष्कार कर दिया है। स्कूल की एक छात्रा हिना कौसर ने बताया कि मुझे स्कूल में प्रवेश करने से पहले हिजाब हटाने के लिए कहा गया था।

इसलिए मैंने परीक्षा में शामिल नहीं होने का फैसला किया है।

दरअसल, कर्नाटक सरकार ने फरवरी की शुरुआत में कर्नाटक शिक्षा अधिनियम 1983 की धारा 133(2) लागू कर दी थी। इसके अनुसार सभी छात्र-छात्राओं के लिए कालेज में तय यूनिफार्म पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। यह आदेश सरकारी और निजी, दोनों कालेजों पर लागू किया गया। मुस्लमि छात्राओं के साथ-साथ कई राजनीतिक दलों ने भी राज्य सरकार के इस फैसले की आलोचना की है। फिलहाल इस मामले पर कर्नाटक हाईकोर्ट में सुनवाई की जा रही है।

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