भाजपा की लहर के बावजूद 2017 में 90 हजार वोटों जीतीं थीं – अदिति सिंह
अदिति सिंह बाहुबली विधायक अखिलेश सिंह की बेटी हैं। उन्होंने 2017 के विधान सभा चुनाव में 90 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी।कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के गढ़ रायबरेली की सदर विधानसभा सीट से विधायक अदिति सिंह बुधवार को भाजपा में शामिल हो गईं। हालांकि, उनका यह फैसला अप्रत्याशित नहीं है। वह पिछले कुछ समय से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा नेतृत्व की प्रशंसा और कांग्रेस नेतृत्व की कड़ी आलोचना करती रही हैं। इसे लेकर कांग्रेस ने नोटिस भी जारी किया था पर इसका उन पर कोई असर नहीं पड़ा। अदिति पूर्व बाहुबली विधायक अखिलेश सिंह की बेटी हैं और जिले में उनका रसूख है। 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था और करीब 90 हजार से अधिक वोटों से जीत दर्ज की थी। उन्हें एक लाख 28 हजार 319 मत मिले थे। अदिति ने यूएसए की ड्यूक यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी है। उनके पिता अखिलेश सिंह भी कांग्रेस के लिए सिरदर्द रहे हैं। लेकिन बेटी ने सियासी पारी रायबरेली की सदर सीट से कांग्रेस के साथ शुरू की। अदिति को कांग्रेस में लाने में प्रियंका गांधी का बड़ा योगदान बताया जाता है। पूर्व में अदिति प्रियंका की प्रशंसक व उनके प्रभावित रही हैं। बीते चुनाव में उन्होंने कहा था कि प्रियंका बहुत ही सशक्त महिला हैं। मैं उनकी गाइडेंस में राजनीति में आना चाहती थी इसीलिए कांग्रेस से चुनावी पारी शुरू की।
पार्टी लाइन के विपरीत जाकर 370 हटाने का किया था समर्थन – कांग्रेस पार्टी ने भले ही जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का विरोध किया हो लेकिन अदिति सिंह ने मोदी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक फैसला है। इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। इससे जम्मू-कश्मीर के लोग मुख्यधारा से जुड़ जाएंगे। एक विधायक की हैसियत से मैं इस फैसले का स्वागत करती हूं।
कृषि कानूनों को वापस लेने पर प्रियंका गांधी पर साधा निशाना – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कृषि कानून वापस लेने पर उन्होंने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी पर निशाना साधा था। अदिति ने कहा कि जब बिल लाए गए तो प्रियंका गांधी को दिक्कत हुई। अब कानून (कृषि कानून) निरस्त होने के एलान के बाद भी उन्हें दिक्कत है। आखिर वह चाहती क्या हैं, उनको स्पष्ट बताना चाहिए। अदिति ने कहा कि प्रियंका इस मामले का सिर्फ राजनीतिकरण कर रही हैं। इसकी वजह ये है कि अब उनके पास मुद्दे नहीं बचे हैं।