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प्रोटोकॉल का बन रहे मजाक

कोलकाता – महानगर समेत पूरे प्रदेश में रोजाना बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामलों के बावजूद लोग अभी भी सुधरने का नाम नहीं ले रहे। कोरोना संक्रमितों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि के बावजूद लोग कोविड प्रोटोकॉल का ठीक से पालन नहीं कर रहे हैं। बाजारों से लेकर सडक़ों पर लोग सब जानते हुए भी कोविड प्रोटोकॉल का मजाक बना रहे हैं।

कोरोना संक्रमितों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि पर  महानगरवासियों ने कुछ इस तरह अपनी प्रतिक्रिया जताई। उनका कहना है कि दुनियाभर में कोरोना से हाहाकार मचा हुआ है फिर भी यदि लोग अपने आप को नहीं बदलते हैं तो इसे जागरूकता की कमी की जगह लापरवाही, अति आत्मविश्वास कहना सही होगा। बिना मास्क वाले लोगों को देखकर उनमें जागरूकता की कमी का बहाना अब नहीं बनाया जा सकता। इनके अनुसार अब वक्त आ गया है कि प्रशासन की ओर से बगैर मास्क पहनकर घूमते लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

“अतरंगी ” दिखी सारा अली खान, बकरी चरातीं

बिन भय हो न प्रीत –  व्यवसायी, बड़ाबाजार कोरोना के खिलाफ जंग में किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि सभी की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। किसी एक के प्रयास से यह लड़ाई जितनी सम्भव नहीं है। इतनी जानें गई। कई लोग अस्पतालों में भर्ती रहे लेकिन इतना सब होने के बावजूद लोग खुद के साथ दूसरों की जान भी जोखिम में डालने पर तुले हैं। यहां गोस्वामी तुलसीदास की पंक्ति लागू करने की नौबत आ गई कि—बिन भय हो न प्रीत।
व्यवसायी, बड़ाबाजार

कोरोना महामारी के इस भयावह दौर में जब शासन प्रशासन प्रचार-प्रसार के जरिेए जनता को जागरूक करने का प्रयास कर रही है। तो जनता को आगे बढ़ कर भी प्रयास करना चाहिए। हम देख रहे हैं कि लोग इस महामारी की त्रासदी को झेलने के बावजूद सतर्क नहीं है। यही लापरवाही हमें अपनों को असमय खोने का सबब है। हमारा आपका दायित्व है कि प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
—-राजेश्वर राय

महज लॉकडाउन ही कोरोना महामारी का हल नहीं है। बस नियमों का पूरा पालन होना चाहिए। पचास प्रतिशत वाली थ्योरी पर हमेशा सन्देह रहेगा। जहां तक सरकार की बात है उन्हें अस्पताल में पर्याप्त बेड, दवाइयों आदि की सुविधाओं को बढ़ाना चाहिए।
–नवरत्न किराडू, मैनेजिंग कंसल्टेंट, लिलुआ.

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