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इरफान खान के जीवन के कुछ अनोखे किस्से

इरफान खान, ये वो नाम है जिसने बॉलीवुड में एक्टिंग का एक नया दौर शुरू किया. जब भी बेहतरीन एक्टिंग की बात हो तो इरफान का नाम ही याद आता है. इरफान खान की फिल्म में न केवल उनकी एक्टिंग बल्कि उनके डायलॉग भी लोगों के दिलों-दिमाग में उतर जाते थे. वो एक ऐसे अदाकार थे जो हिंदी मीडियम से लेकर इंग्लिश मीडियम हर एक के लिए खास थे. अभिनय के ऐसे अदाकार थे, जिसका हर उम्र, हर वर्ग, हर धर्म का शख्स सम्मान किया करता था. अपने रुपहले पर्दे पर निभाए किरदारों की तरह ही इरफान का निजी जीवन भी संघर्षों से भरा था. चाहे वो शुरुआती दौर में गरीबी हो या फिर कैंसर से लड़ाई. इरफान हर जगह योद्धा की तरह लड़े और गम में भी मुस्कुराने की सीख हमेशा दूसरों को देते रहे.

बिना किसी गॉडफादर के इरफान बॉलीवुड के सिकंदर बन गए
इरफान खान बचपन से ही हर छोटी-छोटी चीज के लिए संघर्ष करते आए थे. इरफान खान के पिता स्वर्गीय जागिरदार खान टायर का बिजनेस करते थे, लेकिन उस वक्त इरफ़ान की ज़िंदगी में भूचाल आ गया. जब महज 16 साल की उम्र में ही इरफान के पिता ने दुनिया को अलविदा कह दिया और परिवार की पूरी जिम्मेदारी इरफान के कंधों पर आ गई. हालांकि, इरफान खान ने तब भी हार नहीं मानी, अपनी हाथों की लकीरों को तराशते हुए इरफान खान ने फिल्म इंडस्ट्री की खाक छानना शुरू कर दिया. इरफान खान की पहली फिल्म थी SALAAM BOMBAY, इस फिल्म में इरफान की एक्टिंग को हर किसी ने सराहा लेकिन अब भी उन्हें वो मुकाम नहीं मिला जिसके वो हकदार थे, इसलिए परिवार का पेट भरने के लिए इरफ़ान ख़ान टीवी सीरियल भी किया करते थे.

इरफान खान, ये वो नाम है जिसने बॉलीवुड में एक्टिंग का एक नया दौर शुरू किया. जब भी बेहतरीन एक्टिंग की बात हो तो इरफान का नाम ही याद आता है. इरफान खान की फिल्म में न केवल उनकी एक्टिंग बल्कि उनके डायलॉग भी लोगों के दिलों-दिमाग में उतर जाते थे. वो एक ऐसे अदाकार थे जो हिंदी मीडियम से लेकर इंग्लिश मीडियम हर एक के लिए खास थे. अभिनय के ऐसे अदाकार थे, जिसका हर उम्र, हर वर्ग, हर धर्म का शख्स सम्मान किया करता था. अपने रुपहले पर्दे पर निभाए किरदारों की तरह ही इरफान का निजी जीवन भी संघर्षों से भरा था. चाहे वो शुरुआती दौर में गरीबी हो या फिर कैंसर से लड़ाई. इरफान हर जगह योद्धा की तरह लड़े और गम में भी मुस्कुराने की सीख हमेशा दूसरों को देते रहे.

बिना किसी गॉडफादर के इरफान बॉलीवुड के सिकंदर बन गए
इरफान खान बचपन से ही हर छोटी-छोटी चीज के लिए संघर्ष करते आए थे. इरफान खान के पिता स्वर्गीय जागिरदार खान टायर का बिजनेस करते थे, लेकिन उस वक्त इरफ़ान की ज़िंदगी में भूचाल आ गया. जब महज 16 साल की उम्र में ही इरफान के पिता ने दुनिया को अलविदा कह दिया और परिवार की पूरी जिम्मेदारी इरफान के कंधों पर आ गई. हालांकि, इरफान खान ने तब भी हार नहीं मानी, अपनी हाथों की लकीरों को तराशते हुए इरफान खान ने फिल्म इंडस्ट्री की खाक छानना शुरू कर दिया. इरफान खान की पहली फिल्म थी SALAAM BOMBAY, इस फिल्म में इरफान की एक्टिंग को हर किसी ने सराहा लेकिन अब भी उन्हें वो मुकाम नहीं मिला जिसके वो हकदार थे, इसलिए परिवार का पेट भरने के लिए इरफ़ान ख़ान टीवी सीरियल भी किया करते थे.

तिग्मांशू धूलिया की दमदार फिल्मों में दमदार अभिनय
साल 2003 इरफान खान के लिए वरदान साबित हुआ और इरफान के दोस्त और डायरेक्टर तिंग्माशू धूलिया ने अपनी फिल्म ‘हासिल’ इरफ़ान ख़ान को ऑफर की और साथ ही एक दमदार रोल भी. इसके बाद तो इरफान खान ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा. मकबूल, रोग, लाइफ इन ए मेट्रो, स्लमडॉग मिलेनियर, पान सिंह तोमर और द लंच बॉक्स जैसी हिट फिल्में दीं और राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा गया है.

वो कहते है ना कि वक्त बदलते देर नहीं लगती, इरफ़ान की ज़िंदगी में खुशियों के साथ-साथ दुखों ने भी दस्तक दी और साल 2018 में उन्हें एक दुर्लभ बीमारी ने जकड़ लिया. इस दौरान वो हंसते रहे. लंडन में इलाज चल रहा था, लेकिन सोशल मीडिया पर पॉजिटिव संदेशों के जरिए लोगों तक अपनी तबीयत की जानकारी पहुंचाते रहे.

कैंसर से एक फाइटर की तरह लड़े
इरफान कैंसर से भी एक फाइटर की तरह लड़े और बेहतर होकर 2019 में वापस लौटे. एक बाऱ फिर रुपहले पर्दे पर इरफान की वापसी इंग्लिश मीडियम से हुई जो उनके करियर की आखिरी फिल्म साबित हुई. इरफान खान की आखिरी फिल्म साल 2021 में रिलीज होने जा रही है. इरफान की इस फिल्म का नाम ‘द सॉन्ग ऑफ स्कॉर्पियंस है. असल में यह फिल्म लम्बे समय से ठंडे बस्ते में पड़ी थी और अब इसके मेकर्स ने इसे रिलीज करने का फैसला किया है. तीन साल पहले इस फिल्म का प्रीमियर स्विट्जरलैंड के लोकार्नो फिल्म फेस्टिवल में किया गया था और अब इसे रिलीज करने का फैसला लिया गया.साल 2003 इरफान खान के लिए वरदान साबित हुआ और इरफान के दोस्त और डायरेक्टर तिंग्माशू धूलिया ने अपनी फिल्म ‘हासिल’ इरफ़ान ख़ान को ऑफर की और साथ ही एक दमदार रोल भी. इसके बाद तो इरफान खान ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा. मकबूल, रोग, लाइफ इन ए मेट्रो, स्लमडॉग मिलेनियर, पान सिंह तोमर और द लंच बॉक्स जैसी हिट फिल्में दीं और राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा गया है. वो कहते है ना कि वक्त बदलते देर नहीं लगती, इरफ़ान की ज़िंदगी में खुशियों के साथ-साथ दुखों ने भी दस्तक दी और साल 2018 में उन्हें एक दुर्लभ बीमारी ने जकड़ लिया. इस दौरान वो हंसते रहे. लंडन में इलाज चल रहा था, लेकिन सोशल मीडिया पर पॉजिटिव संदेशों के जरिए लोगों तक अपनी तबीयत की जानकारी पहुंचाते रहे.

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