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बुजुर्गों ने कहा- पत्थर फेंकने वालों को रोकते हैं तो हमें थप्पड़ मारते हैं: कश्मीर से सबसे बड़ी ग्राउंड रिपोर्ट

श्रीनगर. कश्मीर में कर्फ्यू को 39 दिन हो चुके हैं। 65 जानें जा चुकी हैं। एक दिन के लिए भी कर्फ्यू नहीं टूटा। संभवत: देश का सबसे लंबा कर्फ्यू। 2010 में भी हिंसा चार महीने चली थी, पर तब बीच-बीच में कर्फ्यू हट जाता था। लेकिन इस बार…? इन्हीं वजहों को तलाशने के लिए आतंक के गढ़ डाउन टाउन और घाटी के कई हिस्सों में भास्करने 7 दिन गुजारे। युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों, सबसे बातें की। यहां दो तरह के चेहरे नजर आए। एक बेबस और खौफ से भरे, तो दूसरे गुस्से से भरे। पढ़िए डाउन टाउन से उपमिता वाजपेयी की कश्मीर पर सबसे बड़ी रिपोर्ट…
– डाउन टाउन का महाराजगंज कश्मीर का सबसे बड़ा बाजार है। बंद दुकानों के बाहर बैठे बुजुर्ग बताते हैं कि 90 के दशक से ही कर्फ्यू यहां की जिंदगी का हिस्सा रहा है। कर्फ्यू और क्रैकडाउन पहले भी होते थे। कोई शुक्रवार ऐसा नहीं जब यहां पत्थरबाजी न हो। लेकिन इन लड़कों को इतना बेकाबू कभी नहीं देखा।
– जब उनसे पूछा कि पत्थर फेंकने वालों को आप समझाते क्यों नहीं, तो 65 साल के एक बुजुर्ग बोले- “हम उन्हें रोकते हैं तो वो हमें ही थप्पड़ मारते हैं। ये दूसरे मोहल्लों से हमारे इलाके में आकर सिक्युरिटी वालों पर पत्थर फेंकते हैं। हम तो इन्हें पहचान भी नहीं पाते। ये चेहरे पर कपड़ा बांधकर हुड़दंग करते हैं।”
– ”मस्जिदों से लोगों को प्रदर्शन में आने की धमकियां देते हैं। घरों के दरवाजे आधी रात ठोककर कहते हैं सड़क पर निकलो और नारे लगाओ।”
– इस बुजुर्ग की बात पर वहां बैठे कुछ और बुजुर्गों ने हामी भरी और कहा कि हमारे बच्चे ऐसे नहीं हो सकते। पत्थरबाजी यहां पेशा बन चुकी है।
– ये डाउनटाउन वही इलाका है, जहां से घाटी में आतंकवाद शुरू हुआ।
दिन, इलाकों से तय होते हैं पत्थरबाजों के रेट, अफीम, चरस डोज के बदले भी फेंकते हैं
– पुलिस की गिरफ्त में आए कुछ पत्थरबाजों ने खुलासा किया कि कुछ लड़के चरस, अफीम और ड्रग्स के डोज के बदले भी पत्थरबाजी करते हैं। पत्थरबाजों का हर मोहल्ले का अपना हेड है, जो लड़कों को पैसे देता है। हर दिन और इलाके में पत्थरबाजी का अलग-अलग रेट है।
– पूरे दिन के अलग रेट, जुमे के अलग रेट। पाकिस्तान का झंडा लहराने के ज्यादा पैसे मिलते हैं। इन्होंने अपना एसोसिएशन भी बना रखा है। यही एसोसिएशन बयान जारी कर धमकियां देता है। हाल में लड़कियों को स्कूटी चलाने पर स्कूटी समेत जलाने की धमकी भी इन्हीं लोगों ने दी थी।
कैसे फैली कश्मीर में हिंसा?
– हिजबुल के पोस्टर ब्वॉय और कमांडर बुरहान को पिछले महीने सिक्युरिटी फोर्सेस ने मार गिराया था।
– उसकी मौत के बाद कश्मीर में अलगाववादी प्रदर्शन करने लगे। धीरे-धीरे यह हिंसक होता गया।
– बता दें कि 22 साल का बुरहान 15 साल की उम्र में आतंकी बना था। वह पिछले कुछ महीनों से साउथ कश्मीर में बहुत एक्टिव था।
– उसने यहां के कई पढ़े-लिखे यूथ्स को बरगला कर आतंकी बनाया था। कश्मीरी यूथ को रिक्रूट करने के लिए वह फेसबुक-वॉट्सऐप पर वीडियो और फोटो पोस्ट करता था।
– इनमें वो हथियारों के साथ सिक्युरिटी फोर्सेस का मजाक उड़ाते हुए नजर आता था। वानी को भड़काऊ स्पीच देने और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने में एक्सपर्ट माना जाता था।

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